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"उत्तिष्ठत् जाग्रत् प्राप्य वरान्निबोधत"

उठो! जागो! लक्ष्य प्राप्ति तक रुको नहीं.....

          विवेकानंद जी के इस सूत्र वाक्य को चरितार्थ करता हुआ हमारा महाविद्यालय विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। नचिकेता महाविद्यालय का आरंभ सन् 2005 में संस्था के युवा निदेशक श्री हर्ष कुमार पटेल द्वारा हुआ। कारण उनके मानस पटल पर यह बीज उस समय पड़ गया था जब उनकी माँ श्रीमती शोभा बेन पटेल, फाउण्डर डायरेक्टर नचिकेता ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस ने समाजहित और राष्ट्रहित में शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से देश को शिक्षित एवं विवेकी नागरिक सौंपने का बीड़ा उठाया था। जिसका दायित्व उन्होंने नगर की प्रतिष्ठित शिक्षाविद् डॉ. (श्रीमती) पी. आर. चंद्रा को प्रथम प्राचार्य के रूप में पदस्थ कर प्रदान किया। जिनके कुशल मार्गदर्शन में महाविद्यालय उत्तरोत्तर प्रगतिशील है। महाविद्यालय में आरंभ से ही वाणिज्य विभाग, विज्ञान विभाग, कम्प्यूटर विभाग एवं प्रबंधन विभाग को समाहित किया गया। वर्तमान में विस्तार के अंतर्गत कला विभाग का शुभारंभ होने जा रहा है।
          महाविद्यालय ने चौदह विद्यार्थियों एवं छ: पाठ्यक्रमों से अपना अध्यापन कार्य प्रारंभ किया जो अब लगभग 1400 विद्यार्थियों एवं 13 पाठ्यक्रमों के साथ विस्तारित है। आरंभ से ही महाविद्यालय सौहाद्र्रपूर्ण वातावरण में सह शिक्षा (Co-Ed) प्रदान करता आ रहा है। वर्तमान में 40 प्रतिशत छात्राएँ तथा 60 प्रतिशत छात्र अध्ययनरत् हैं। तीन मंजिला इमारत जिसमें एक हॉल, दो कम्प्यूटर लैब (वातानुकूलित), लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स रूम, सेमीनार हॉल, भौतिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स प्रयोगशाला, 25 से अधिक व्याख्यान कक्ष, एक विशाल क्रीड़ांगन के साथ जबलपुर के रमणीय स्थल बड़े शिवजी, कचनार सिटी के ठीक पूर्व स्थित है।
          महाविद्यालय में संचालित समस्त विभागों में अध्ययन-अध्यापन कार्य पूर्ण गुणवत्ता के साथ योग्य एवं अनुभवी आचार्यो के मार्गदर्शन में संपादित होता है। विश्वविद्यालय स्तर की समस्त खेल प्रतियोगिताओं में महाविद्यालय की सक्रिय सहभागिता रहती है; जिसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं विभिन्न खेलों जैसे- हॉकी, शतरंज, कबड्डी, कुश्ती इत्यादि में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त कर महाविद्यालय को गौरवान्वित कर रहे हैं। अनेक विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय स्तर की विभिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होकर विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची में महत्त्वपूर्ण स्थान अर्जित किया है।
          विद्यार्थियों को जहां हम पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा देने में तत्पर हैं वहीं उनके चरित्र निर्माण के लिए उन्हें नैतिक, सामाजिक तथा धार्मिक सहिष्णुता की शिक्षा दी जाती है जिसके अंतर्गत महाविद्यालय द्वारा सर्वधर्म समभाव का पोषण, Joy of Giving (देने का सुख) वृद्धाश्रमों एवं दिव्यांगों के शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण, नवरात्री, रोज़ा अफ़्तार, हनुमान जन्मोत्सव (सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ), गणेशोत्सव एवं महावीर जयंती जैसे विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
          सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के द्वारा युवाओं को मंच प्रदान करने के लिए नवागन्तुकों का स्वागत एवं युवा महोत्सव जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। अकादमिक प्रगति हेतु क्लबों (उत्कर्ष विज्ञान क्लब, कम्प्यूटर अवेयरनेस क्लब, यूथ कॉमर्स क्लब, प्रूडेन्ट मैनेजमेंट क्लब, एक्सेलेंस लैंग्वेज क्लब) द्वारा पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा के अतिरिक्त ज्ञानवर्धन का प्रयास किया जाता है। अत: पॉवर पॉइंट प्रेजेन्टेशन, पुनरावृत्ति कक्षाएं, अतिथि व्याख्यान, पुराने प्रश्नपत्रों का हल किया जाना, क्लास टेस्ट, प्रश्नमंच, सेमीनार आदि का आयोजन किया जाता है।
          विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में महाविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न प्रकोष्ठ जैसे- सामाजिक सेवा समिति प्रकोष्ठ, महिला प्रकोष्ठ, स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रकोष्ठ, कौशल विकास प्रकोष्ठ पूर्ण दक्षता के साथ विविध आयोजन एवं प्रशिक्षण हेतु कटिबद्ध रहते है। ताकि महाविद्यालय अपने सर्वोपरि लक्ष्य- "Leader in Quality Education" को प्राप्त कर सके।